INDIAN RAILWAY, पूर्व तटीय रेलवे सरकार का पहला कचरे से बनाने वाला प्लांट स्थापित किया है

INDIAN RAILWAY  पूर्व तटीय रेलवे सरकार का पहला कचरे से बनाने वाला प्लांट स्थापित किया है

  • प्लांट 450 डिग्री के आसपास पर काम करता है दूसरे विकल्पों के मुकाबले इसकी प्रक्रिया कम तापक्रम वाली है|
  • मात्र दो करोड़ की लागत और 3 महीने के भीतर में यह उर्जा प्लांट का निर्माण  पूरा कराया गया है|
  • यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें डाले गए विभिन्न प्रकार के कचरे को हाइड्रोकार्बन तरल ईंधन जैसे गैस, कार्बन और पानी में बदल देती है|
INDIAN RAILWAY, पूर्व तटीय रेलवे सरकार का पहला कचरे से बनाने वाला प्लांट स्थापित किया है
मात्र दो करोड़ की लागत और 3 महीने के भीतर में यह उर्जा प्लांट का निर्माण  पूरा कराया गया है|

 

नई दिल्ली, एरो इंडिया न्यूज़ / पोलीक्रैक के नाम से जाना जाने वाला इलेक्ट्रॉनिक कचरे और

प्लास्टिक को 24 घंटे में हल्के डीजल में बदल देने वाली पेटेंट कराई गई इस तकनीकी की जानकारी

गुरुवार को अधिकारियों द्वारा दी गई| आपको बता दें की पूर्व तटीय रेलवे ने सरकार का पहला कचरे

से  बननेवाला प्लांट स्थापित किया है| तकनीक का इस्तेमाल इस कचरे से ऊर्जा प्लांट में किया जाएगा|

 

जेपी मिश्रा ने कहा जो अभी पूर्व तटीय रेलवे के प्रवक्ता है| उन्होंने कहा यह दुनिया की पहली पेटेंट

कराई गई हेटेरोजेनॉस कैटेलाइटिक प्रक्रिया है| यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें डाले गए विभिन्न

प्रकार के कचरे को हाइड्रोकार्बन तरल ईंधन जैसे गैस, कार्बन और पानी में बदल देती है| डिब्बा 

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नहीं होने से उन्हें खाली जगह में फेंक दिया जाता था| ऐसा कचरा पर्यावरण पर खतरनाक प्रभाव डालता था|

INDIAN RAILWAY  पूर्व तटीय रेलवे सरकार का पहला कचरे से बनाने वाला प्लांट स्थापित किया है

इस प्रक्रिया में कचरे को चुनकर अलग करने की कोई जरूरत नहीं|

 

जेपी मिश्रा ने कहा कि इस प्रक्रिया में मशीन में डालने से पहले कचरे को चुनकर अलग करने

की जरूरत नहीं पड़ती और उन्होंने यह भी कहा कि इसमें नमी सोखने की क्षमता है| इसेलिए

कचड़े को मशीन में डालने से पहले सुखाने की जरूरत नहीं पड़ती| और यह पूरी प्रक्रिया 24 घंटे 

के अंदर पूरी हो जाती है 24 घंटे के अंदर प्रसंस्करण काम पूरा हो जाता है|

 

 कितने करोड़ की लागत से तैयार हुआ प्लांट

 

आपको बता दें मात्र दो करोड़ की लागत और 3 महीने के भीतर में यह उर्जा प्लांट का निर्माण 

इस प्रक्रिया में उत्पन्न गैस का प्रणाली में इस्तेमाल होने से ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर है| और इससे इसका संचालन खर्च भी कम हो जाता है|

 

पूरा कराया गया है|इस प्रक्रिया में उत्पन्न गैस का प्रणाली में इस्तेमाल होने से ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर है|

और इससे इसका संचालन खर्च भी कम हो जाता है| यह प्लांट छोटा है, इसीलिए स्थापित करने के

लिए ज्यादा जगह की जरूरत नहीं पड़ती है| प्लांट 450 डिग्री के आसपास पर काम करता है दूसरे

विकल्पों के मुकाबले इसकी प्रक्रिया कम तापक्रम वाली है|  आपको बता दें यह रेलवे में अपनी

                                                                                                          यह भी पढ़ें

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तरह का पहला और देश में चौथा प्लांट है जो फालतू फेंके गए कचरे से इंधन बनाने वाला प्लांट है|

 

 

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