मैरी कॉम ने निकहत ज़रीन को हराकर ओलंपिक क्वालीफायर के लिए भारतीय टीम में जगह बनाई

मैरी कॉम ने निकहत ज़रीन को हराकर ओलंपिक क्वालीफायर के लिए भारतीय टीम में जगह बनाई

छह बार की विश्व चैंपियन एमसी मैरी कॉम ने शनिवार को दिल्ली में निखत जरीन

को 51 किग्रा फाइनल में हरा दिया। इसी के साथ निखत का टोक्यो ओलंपिक में खेलने

का सपना चकनाचूर हो गया और यह तय हो गया कि भारत की ओर से इस श्रेणी में

सुपरमॉम मैरी कॉम ही भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। बाउट में बहुत कम मुक्के चले

और मैरी कॉम ने 9-1 से जीत हासिल कर टीम में जगह बनाई।

ओलंपिक क्वालीफायर अगले साल फरवरी में चीन के वुहान में 3 से 14 फरवरी तक खेले जाएंगे।

इसके पहले दोनों ही मुक्केबाजों ने शुक्रवार को अपने पहले दौर के मुकाबलों में

सर्वसम्मत फैसले में जीत हासिल की थी। पूर्व जूनियर विश्व चैम्पियन निखत जरीन ने

शुक्रवार को ज्योति गुलिया को जबकि कई बार की एशियाई चैंपियन मैरी कॉम ने रितु ग्रेवाल को मात दी।

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मैरी कॉम ने निकहत ज़रीन को हराकर ओलंपिक क्वालीफायर के लिए भारतीय टीम में जगह बनाई

रवैये के बाद जरीन ने कुछ हफ्ते पहले छह बार की विश्व चैम्पियन एमसी मैरी कॉम के

खिलाफ ट्रायल की मांग कर हंगामा खड़ा कर दिया था। मैरी कॉम ने कहा था कि वह

बीएफआई की नीति का पालन करेंगी, जिसने अंत में ट्रायल्स कराने का फैसला किया।

बीएफआई अध्यक्ष अजय सिंह ने एक सम्मान समारोह में घोषणा कर हलचल मचा दी थी

कि मैरी कॉम को उनके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अच्छे प्रदर्शन के कारण बिना किसी

ट्रायल के ओलंपिक क्वालीफायर के लिए चुना जाएगा। इससे नाराज जरीन ने उचित मौका

दिए जाने की मांग की थी। पुरूषों का दो दिवसीय ट्रायल कर्नाटक के बेलारी में रविवार से शुरू होगा।

ओलंपिक क्वालीफायर को लेकर निखत जरीन और मैरी कॉम का विवाद जगजाहिर है।

अब जब फाइनल में मैरी कॉम से निखत को शिकस्त मिली तो उसके बाद रिंग पर भी

आपसी तनाव देखने को मिला। दरअसल, मैच के बाद मैरी कॉम ने निखत जरीन से नहीं मिलाया।

उन्होंने कहा, ‘मैं उनसे क्यों हाथ मिलाऊं? वह चाहती हैं कि दूसरे लोग उनका सम्मान

करें तो पहले उन्हें सबका सम्मान करना होगा। मुझे ऐसे स्वभाव के लोग पसंद नहीं हैं।

रिंग के अंदर अपने पॉइंट प्रूव करो, बाहर नहीं।’

इस मसले पर निखत का कुछ और ही कहना है। 23 वर्षीय मुक्केबाज ने कहा कि, ‘मैरी कॉम

युवाओं के लिए आदर्श हैं। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। मुझे उनका व्यवहार बिलकुल

पसंद नहीं आया क्योंकि जब निर्णय का एलान हुआ तब मैं उनसे गले मिलने की कोशिश

कर रही थी, लेकिन उनकी प्रतिक्रिया अच्छी नहीं थी। उन्होंने मैच के बाद ही नहीं मैच के

दौरान भी मुझे गाली दी थी। बतौर जूनियर मैं भी एक सीनियर से अपने छोटे के प्रति सम्मान की उम्मीद करती हूं। मुझे ठेस पहुंचा।

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